भारतीय Airtel Founder Sunil Mittal Biography In Hindi

सुनील मित्तल का प्रारंभिक जीवन –Sunil Mittal Early Life Information in Hindi


सुनील मित्तल का जन्म 23 अक्टूबर 1957 को पंजाब के लुधियाना में हुआ था। उनके पिता का नाम सतपाल मित्तल था। जो एक राजनेता के थे। और दो बार लोकसभा से और एक बार राज्यसभा से सांसद भी रह चुके थे। लेकिन 1992 में उनकी मृत्यु हो गई थी।


सुनील ने अपनी शुरुआती पढ़ाई मसूरी के विन बर्ग एलन स्कूल और ग्वालियर के सिंधिया स्कूल से की। और फिर 1976 में पंजाब यूनिवर्सिटी से उन्होंने बैचलर ऑफ आर्ट एंड साइंस में अपनी ग्रेजुएशन पूरी की।

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सुनील का कहना है कि उन्हें शुरुआत से ही पढ़ाई में कोई दिलचस्पी नहीं थी। और बचपन से ही वे अपना खुद का बिजनेस शुरू करना चाहते थे। इसीलिए केवल 18 साल की उम्र में उन्होंने बिजनेस की तरफ अपना पहला कदम रखा।

और अपने पिता से ₹20000 लेकर अपने दोस्तों के साथ मिलकर साइकिल के पार्ट बनाने लगे। कुछ समय इस बिजनेस में देकर उन्हें लगा कि वह इस बिजनेस में आगे नहीं बढ़ सकते, इसलिए उन्होंने उसे बंद कर दिया।

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 और वह मुंबई चले गए और कुछ दिनों बाद उन्होंने इंपोर्ट लाइसेंस खरीदा। और फिर जापान से जनरेटर मंगा कर बेचने का काम शुरू किया। इस बिजनेस से उन्हें काफी फायदा हुआ और लगने लगा कि अब वह सफल हो गए।


लेकिन भारत सरकार ने बाहर से आने वाले जनरेटर को भारत में बंद करवा दिया। क्योंकि दो भारतीय कंपनियों को भारत में जनरेटर बनाने का लाइसेंस दे दिया गया था। लेकिन इससे सुनील मित्तल ने हार नहीं मानी और उन्होंने सोचा कि आगे चलकर ऐसा कोई बुरा वक्त आएगा तो उसका फायदा उठाना है। आगे भी सुनील अलग-अलग काम करते रहे।


1984 में ताइवान की कंपनी किंगटेल से उन्होंने नई जनरेशन का पुश बटन फोन इंपोर्ट कर बेचने लगे। क्योंकि अभी तक भारत में वही पुराने फोन इस्तेमाल किए जा रहे थे जिनके नंबरों को दबा दबा कर घुमा कर लगाया जाता था। 1990 में सुनील ने फैक्स मशीन और बिना तार वाले फोनों की भी बिक्री की।

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 लेकिन उसके बाद जो हुआ उसने सुनील मित्तल की जिंदगी बदल दी। 1992 में भारत में नीलाम हो रहे मोबाइल फोन नेटवर्क के लाइसेंस के लिए बोली लगाई। और चार कंपनियों में से उनकी कंपनी BCL को भी लाइसेंस मिल गया। हालांकि उन्हें यहां भी कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

भारत सरकार ने लाइसेंस लेने वाली कंपनियों के लिए एक शर्त रखी थी। कि उनको टेलीकॉम ऑपरेटर के रूप में कुछ ना कुछ अनुभव जरूर होना चाहिए। इसीलिए मित्तल ने एक फ्रेंच की टेलीकॉम कंपनी के साथ समझौता किया। और इस समस्या को भी उन्होंने हल कर दिया।


और फिर एयरटेल ब्रांड नाम के साथ कंपनी ने कुछ ही सालों में 2000000 मोबाइल ग्राहकों का आंकड़ा पार कर लिया। और ऐसा करने वाली एयरटेल कंपनी पहली टेलीकॉम कंपनी बनी। 2007 में सुनील मित्तल को भारत का तीसरा सबसे बड़ा नागरिक पुरस्कार पदम श्री से सम्मानित किया गया।

सुनील मित्तल एक बिजनेसमैन होने के साथ ही साथ एक समाजसेवी के रूप में काम करते हैं। वह भारतीय फाउंडेशन नाम की एक ट्रस्ट चलाते हैं, जो गांव के गरीब बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन, फ्री बुक्स, और यूनिफॉर्म प्रदान करता है।


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