कैडबरी चॉकलेट सफलता की कहानी cadbury chocolate success story in hindi

कैडबरी चॉकलेट सफलता की कहानी cadbury chocolate success story in hindi


कहानी की शुरुआत होती है जॉन कैडबरी नाम के एक बच्चे से। जिसका जन्म करीबन 1801 में ब्रिटेन के बर्मिंघम में हुआ था। जॉन एक कुअकर्स धर्म से ताल्लुक रखते थे। और इस धर्म के लोगों की एक अलग ही मान्यताएं थी। वह चर्च या किसी भी धार्मिक स्थान से नहीं जुड़े हुए थे। उन्हें अपने और ईश्वर के बीच किसी की भी मौजूदगी पसंद नहीं थी।

अपनी अलग मान्यता होने की वजह से उन्हें समाज में अलग नजरिए से देखा जाता था। ना ही उन्हें अच्छे स्कूल में दाखिला मिलता और ना ही कहीं अच्छी नौकरी मिलती। यहां तक कि वह सेना में भी नहीं जा सकते थे। उनके पास बचा कुचा एक ही विकल्प होता था अपना खुद का बिजनेस करना। इसीलिए अपने धर्म के स्कूल में पढ़ाई करने के बाद जॉन कैडबरी एक कॉफी शॉप में काम करने लग गए।

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और आगे चलकर 1824 में उन्होंने खुद की दुकान खोली। जहां वे कॉफी चाय और चॉकलेट ड्रिंक बेचा करते थे। आगे चलकर उन्हें पता चला कि चाय और कॉफी से ज्यादा लोग उनकी चॉकलेट को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। और फिर 1831 से उन्होंने चाय और कॉफी को छोड़ केवल चॉकलेट बेचना शुरू किया।

जिसकी मांग बहुत तेजी से बढ़ी। और उसी साल करीबन 16 वैरायटी की चॉकलेट उन्होंने अपने लिस्ट में जोड़ी। देखते ही देखते वह अपने आसपास के सभी इलाकों में अगले 15 साल के अंदर चॉकलेट ड्रिंक बेचने के लिए काफी फेमस हो गए। आगे चलकर 1847 में उन्होंने अपने भाई बेंजामिन को भी इसी बिजनेस में शामिल कर लिया। और दोनों ने मिलकर ब्रिज स्ट्रीट में एक बहुत बड़ा कारखाना खोला।

कैडबरी शुरू से ही अपनी क्वालिटी के लिए जानी जाती है। इसीलिए 1854 में रानी विक्टोरिया ने इसे रॉयल वारंट का सर्टिफिकेट दिया। रॉयल वारंट का सर्टिफिकेट केवल उन्हीं लोगों को मिलता था जिनकी क्वालिटी सबसे अच्छी थी। और जिन उत्पादों को राजा महाराजा अपने लिए उपयोग में लाते थे। धीरे-धीरे करके कैडबरी अपनी बेहतरीन उत्पात के लिए पूरे ब्रिटेन में फेमस हो गई।


1860 में बिजनेस में नोकझोंक होने की वजह से भाई बेंजामिन ने जॉन कैडबरी से अलग होने का फैसला कर लिया। और तब तक जॉन की उम्र ढलती जा रही थी इसलिए उन्होंने कंपनी की कमान अपने दो बच्चों रिचर्ड और जॉर्ज को दे दी। दोस्तों किसी भी उत्पाद को जारी रखने के लिए सबसे जरूरी है परिवर्तन, रिचर्ड और जॉर्ज ने कंपनी की कमान संभालने के बाद काफी सारे नए-नए परिवर्तन किए।

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और वह काफी सफल भी रहे। पूरे ब्रिटेन में अपना कब्जा जमाने के बाद 1870 में कैडबरी को दूसरे देशों में भी बेचा जाने लगा। इसी बीच 11 मई 1889 को कैडबरी के फाउंडर जॉन कैडबरी ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। और अगले 10 सालों में उनके एक बेटे रिचर्ड की भी मृत्यु हो गई।

जिसके बाद बचे जॉर्ज कैडबरी, जिन्होंने रिटायरमेंट से पहले एक ऐसी खोज की जिसने कंपनी को एक नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। जॉर्ज ने 1905 में कैडबरी की मशहूर चॉकलेट डेरी मिल्क का आविष्कार किया। जिसकी रिसर्च को वह 1897 से ही कर रहे थे। जॉर्ज कैडबरी डार्क चॉकलेट में कुछ नया करने की सोच रहे थे उन्होंने उसमें चीनी और दूध मिलाया। और जब इसके मिक्सर को चखा गया तो इसमें कमाल का स्वाद था।

और जब इसे सुखाकर चखा गया तो और भी जबरदस्त से स्वाद था। और इसी तरह कैडबरी की डेरी मिल्क चॉकलेट बनी जो अभी भी कैडबरी की सबसे लोकप्रिय चॉकलेट है।
 1948 में आजादी के 1 साल बाद कैडबरी ने भारत में भी दस्तक दी। और यहां भी वह अच्छी टेस्ट और क्वालिटी की वजह से लोगों की आदत बन गई।

पूरी दुनिया में 50 से भी ज्यादा देशों में कैडबरी का बोलबाला है। तो आपको पता चला कि कैडबरी की नीव उस व्यक्ति ने रखी जिसने ना ही अपने मनपसंद के स्कूल में दाखिला ले पाए, और ना ही वह कोई अच्छी जॉब कर सकते थे। लेकिन उनका दृढ़ संकल्प ही था जिसकी वजह से आज उनकी बनाई हुई कंपनी इतनी मशहूर है।

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