( Father's Day ) की सुरूआत कैसे हुई - Gyanhindime


दोस्तों वैसे तो हमारी संस्कृति में हमारे माता पिता का स्थान सर्वोच्च रहा है। लेकिन कुछ देशों में किसी दिन को खास बना कर उसे हर साल काफी धूमधाम से बनाते हैं। और उन्हीं दिनों में से एक दिन है फादर्स डे है। 


father's day ki suruat kaise hui
father's day ki suruat kaise hui


फादर्स डे की शुरुआत 6 दिसंबर 1907 में अमेरिका के बेस्ट व्रजेनिया से हुई थी। इस विशेष दिन का आरंभ एक खान खुदाई में मारे गए 210 पिताओं की याद में किया गया था। और आज के समय में लगभग सभी देश इस दिन को मनाते हैं।


दोस्तों अगर हमारा इस दुनिया में कुछ भी अस्तित्व है या फिर हम जो कुछ भी हैं उसका सारा श्रेय हमारे माता-पिता हो जाता है। जन्म से लेकर हमें हमारे पैरों पर खड़े करने तक जो भी संघर्ष झेलना पड़ता है, उसका एहसास सिर्फ माता-पिता बनकर ही हो सकता है। अक्सर टीवी देखने, बाल बढ़ाने ,गलती करने या ऐसे ही छोटे-मोटे कारणों पर डांटने वाले पिता की छवि हमारे लिए हिटलर के समान होती है। हमे ये बातें हमें बड़े होकर समझ में आने वाले हमारे पिता का मकसद हमेशा हमारी भलाई के लिए होती है। बचपन से हमारे पिता खटोर बनकर हमें कठिनाइयों से लड़ना सिखाते हैं। पिता ही एक ऐसे शख्स हैं, जो अपनी खुशियों की परवाह न करते हुए हमारी खुशियों को संझौते हैं। दोस्तों एक पिता ही हैं, जो कभी मां बनकर तो कभी शिक्षक बनकर हमारी गलतियों को बताते हैं। और कभी कभी तो वह दोस्त बनकर यह कहने में संकोच नहीं करते, कि बेटा मैं तुम्हारे साथ हूं। दोस्तों हमारे लिए हमारे पिता कुछ चीजों की व्यवस्था कैसे कर देते हैं पता ही नहीं चलता। जाहिर बात है, कि अपने बच्चे की परेशानियों को हल करके उनके चेहरे पर जरा सी भी शिकन नहीं आती। दोस्तों अगर कोई डॉक्टर इंजीनियर या कोई भी बड़े स्थान पर है, तो उसके पीछे उसके माता-पिता का बहुत ही बड़ा हाथ है। क्योंकि वह अपना सब कुछ लगा कर उसे उस मुकाम तक पहुंचाते हैं। इसीलिए दोस्तों हम चाहे जितने बड़े मुकाम तक पहुंच जाए लेकिन हमें अपने माता-पिता के संघर्षों को कभी नहीं भूलना चाहिए। माता-पिता की सेवा से मनुष्य को जो आशीर्वाद मिलता है। उससे उसे आत्म संतुष्टि प्राप्त होती हैं। अंत में हम यही बताना चाहेंगे , कि हर इंसान के अंदर अनुभूति होती है। अगर किसी को उसकी संतान सुख दे। तो उसे अच्छा ही लगेगा। इसीलिए अपने पिता को सुख दे।


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Hemraj Kumar 


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