Ravichandran Ashwin बॉलर बनने ki kahani - Gyanhindime


रविचंद्र अश्विन का प्रारंभिक जीवन – Ravichandran Ashwin Early Life Information 

Ravichandran Ashwin ki kahani
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 रविचंद्र अश्विन का जन्म 17 सितंबर 1986 को तमिलनाडु के चेन्नई शहर में हुआ था। उनके पिता का नाम रविचंद्रन और मां का नाम चित्रा है। बहुत ही कम लोगों को पता है, कि अश्विन के पिता भी एक फास्ट बॉलर रह चुके हैं। जिन्होंने क्लब लेवल पर बहुत सारे क्रिकेट खेले हैं। 

अश्विन ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पदम शेषाद्री बाला भवन और सेंट बेड़े से की। जहां वह एक अच्छे स्टूडेंट थे। और स्कूल की क्रिकेट टीम में बेस्ट मैन के तौर पर खेलते थे। 14 साल की उम्र में उनकी हिप ज्वाइंट पर चोट लग गई थी। जिसके बाद उन्हें 2 महीने तक बिस्तर पर रहना पड़ा। और करीब 1 साल तक वह क्रिकेट नहीं खेल पाए। 1 साल बाद अश्विन ने वापसी की और उन्होंने बोलिंग की तरफ ध्यान दिया।

आगे चलकर उन्होंने एस.एस.एन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में एडमिशन लिया। जहां से उन्होंने IT से उन्होंने b.tech की पढ़ाई पूरी की। लेकिन एक इंजीनियर बनने के अलावा उन्होंने क्रिकेट में अपना करियर बनाने के सोचा। और पहली बार दिसंबर 2006 में उन्हें फर्स्ट क्लास क्रिकेट में तमिलनाडु की तरफ से खेलने का मौका मिला। जहां उन्होंने पहली ही सीरीज में अपनी जबरदस्त परफॉर्मेंस से सबको आश्चर्यचकित कर दिया। जिसकी वजह से उन्हें अगले सिसन के लिए तमिलनाडु का कैप्टन बना दिया गया।

 2006 से 2009 तक अश्विन ने तमिलनाडु और साउथ जोन की तरफ से मैच खेले। और फिर 2009 में उन्हें आईपीएल की चेन्नई टीम की तरफ से खेलने का मौका मिला। हालांकि उन्हें प्लेइंग इलेवन के दो मैचों में ही खिलाया गया। जिसकी वजह से वह अपनी प्रतिभा को साबित करने में नाकाम रहे। लेकिन अगले ही आईपीएल में में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले प्लेयर बने। और उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट के खिताब से नवाजा गया। 

2010 की आईपीएल में जबरदस्त प्रदर्शन करने की वजह से उन्हें इंडिया की नेशनल टीम में खेलने का मौका मिला। जहां उन्होंने जून 2010 में जिंबाब्वे का दौरा किया। 5 जून 2010 को उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ अपना पहला वनडे डेब्यू किया। जिस मैच में उन्होंने 32 गेंदों पर 38 रन बनाए। और बॉलिंग में 50 रन देते हुए 2 विकेट झटके। इस सीरीज के एक हफ्ते बाद ही अश्विन ने जिंबाब्वे के खिलाफ अपना T20 डेब्यू किया। जहां उन्होंने 4 ओवर में 22 रन देकर 1 विकेट लिया। 

अगले साल अश्विन को न्यूजीलैंड और श्रीलंका के खिलाफ ट्राई सीरीज के लिए चुना गया। लेकिन प्रज्ञान ओझा और रविंद्र जडेजा के खेलने की वजह से उन्हें टीम में खेलने का मौका नहीं मिला। आखिरकार अक्टूबर में चयनकर्ताओं ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज में स्पिनर्स को बैठाकर कुछ नये खिलाड़ियों को मौका देने का सोचा, जिससे अश्विन की टीम में फिर से वापसी हुई।

 इस सीरीज में अश्विन काफी किफायती साबित रहे। जिसमें उन्होंने 9 ओवर में 34 रन देकर 1 विकेट लिया। और वह मैच भारत ने 5 विकेट से जीत लिया था। अश्विन नवंबर दिसंबर 2010 में न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू श्रृंखला के सभी पांच मैचों में खेले। जिसमें उन्होंने 11 विकेट लेकर सीरीज में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले खिलाड़ी बने। हालांकि इतना अच्छा परफॉर्मेंस करने के बाद भी दक्षिण अफ्रीका के दौरे के किसी भी क्रिकेट में खेलने का उन्हें मौका नहीं मिला। 

क्योंकि उनकी जगह हरभजन सिंह को टीम में शामिल किया गया था। अश्विन ने नवंबर 2011 में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना टेस्ट डेब्यू भी किया। जिस मैच में उन्होंने कुल 9 विकेट लिए। और उनके इसी जबरदस्त परफॉर्मेंस की वजह से उन्हें मैन ऑफ द मैच चुना गया। और वे तीसरे ऐसे भारतीय क्रिकेटर बने जिन्होंने अपने पहले ही टेस्ट मैच में यह मुकाम हासिल किया। 

इस मैच के बाद सचिन ने अपनी कैप अश्विन को दी। और बस यही से अश्विन ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। और अपने 18 टेस्ट मैचों में 100 विकेट लेकर सबसे ज्यादा विकेट लेने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बना डाला। और यह सिलसिला यूं ही चलता रहा। और केवल 45 मैचों में सबसे जल्दी 250 विकेट लेने वाले सबसे पहले खिलाड़ी बन गए। भारतीय टीम में अपने योगदान के लिए भारतीय सरकार ने उन्हें 2014 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया। 

और सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ के अलावा वे तीसरे से खिलाड़ी बने जिन्होंने आईसीसी क्रिकेटर ऑफ द ईयर का खिताब अपने नाम किया है। अगर पर्सनल लाइफ की बात करें तो उन्होंने अपनी बचपन की दोस्त पृथि नारायण से शादी की। जिनसे उन्हें दो बच्ची हुई जिसका नाम उन्होंने आखिर और अध्य रखा।


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Hemraj Kumar 


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