मिकी माउस के पिता की कहानी walt disney biography in Hindi


आंखों में मंजिले थी गिरे और संभलते रहे। हवाओं में क्या दम था चिराग आंधियों में भी जलते रहे।


Walt Disney biography in Hindi हम बात कर रहे हैं ऐसे कलाकार की ऐसी शख्सियत की जिन्होंने अपनी अलग ही सोच से अनगिनत बच्चों में खुशियां बिखेरी हैं। जी हां वह शख्सियत हैं वॉल्ट डिज्नी जो मिकी माउस जैसे और बहुत सारे कार्टून के जनक दाता है। जिन्हें उनकी एनिमेशन फिल्मों के लिए 22 बार ऑस्कर दिया जा चुका है।जो अपने आप में एक विश्व रिकॉर्ड है।


उनके द्वारा बनाई गई द वॉल्ट डिजनी कंपनी दुनिया की टॉप कंपनी में शामिल है। और अरबों खरबों का बिजनेस करती है। लेकिन डिज्नी ने यह मुकाम हासिल किया है मुझे नहीं लगता कि उनके जैसा संघर्ष करके कोई यह मुकाम हासिल कर सकता है। तो चलिए दोस्तों आपका समय बर्बाद ना करते हुए हम वॉल्ट डिज्नी के बारे में शुरू से जानते है।


वाल्ट डिज्नी का प्रारंभिक जीवन – walt disney Early Life Information in Hindi


walt disney biography in Hindi
 Walt Disney biography in Hindi


वाल्ट डिज्नी का जन्म 5 दिसंबर 1901 को अमेरिका केइलिनोइस राज्य में हेर्मोस नाम की जगह पर हुआ था। उनके पिता का नाम इलियास डिज्नी था। जो एक किसान थे और साथ ही साथ एक बढ़ई का काम भी करते थे। लेकिन इन सब से गुजारा ना होने के कारण से उन्होंने बाजार में फल बेचने का भी काम किया। हालांकि अलग-अलग काम करने के बावजूद भी उनके पास इतने पैसे नहीं हो पाते थे कि वह घर का गुजारा कर सके। और वह अपने बच्चों को स्कूल भेज सकें।


इसीलिए उन्होंने अपना खेत बेच दिया और 1906 में एक छोटे से गांव में आकर बस गए। जहां पर वोल्ट के अंकल की जमीन पहले से थी। वॉल्ट के अलावा उनके तीन भाई और एक छोटी बहन भी थी। और अगर ड्रॉइंग की बात करें तो उन्हें शुरू से ड्रॉइंग करना बहुत पसंद था। वह फर्श और दीवार पर कुछ ना कुछ बनाते रहते थे। एक बार तो उन्होंने अपनी छोटी बहन के साथ मिलकर तारकोल से एक पेंटिंग बना डाली।


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और पूरा दीवार काला हो गया। जिससे उन्हें अपने पिता से बहुत डांट सुननी पड़ी थी। डिज्नी ने 7 साल की उम्र में अपने पड़ोसियों के घोड़ों की तस्वीर बनाई। और वह ड्राइंग उनके पड़ोसी को इतना पसंद आया कि उन्होंने उस ग्रोइंग को पैसे देकर खरीद लिया। और इस तरह यह डिजनी की पहली कमाई थी।


अगर बात की जाए डिज्नी के सबसे करीबी की तो वे उनके भाई रोए थे। जिसके साथ में अपना पूरा समय बिताते थे। 1909 में डिज्नी का एडमिशन पास के एक छोटे से स्कूल में कराया गया। लेकिन उनका परिवार पैसों की दिक्कत की वजह से उस गांव में नहीं रह सका।


और सिरको 1911 में आर्थिक तंगी झेलते हुए कंन्सास नाम की एक जगह पर आ गए। जहां पर बोल्ट के पिता को न्यूज़पेपर ऑल मैगजीन बाटने का काम मिल गया। और कुछ पैसे इखट्टे हो जाने के बाद वॉल्ट के पिता ने उनका एडमिशन मेंटन ग्रामर स्कूल में करा दिया। लेकिन न्यूज़पेपर ज्यादा होने की वजह से वॉल्ट और उनके भाई को उनके पिता का हाथ बटाना पढ़ता था।


और रोज सुबह 4:00 बजे उठकर कड़ाके की ठंड में newspaper बांटने जाना पड़ता था। पेपर बाटने के बाद वह स्कूल चले जाते थे। और फिर शाम को स्कूल से वापस आने के बाद फिर से मैगजीन बाटने चले जाया करते थे। वॉल्ट और रॉय इस काम से इतना थक जाते थे कि वह स्कूल की क्लास में ही सो जाते थे।


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और इसीलिए वह अपनी क्लास में सबसे कमजोर स्टूडेंट में गिने जाते थे। लेकिन इतने कठिनाई वाले दिनों में भी वॉल्ट ने कभी भी ड्रॉइंग करना नहीं छोड़ा। और उन्हें कभी भी टाइम मिलता तो वह मैगजीन के कबर को देख कर या अपने दिमाग में कुछ भी सोच कर ड्रॉइंग करने लग जाया करते थे। वह अपने पास के एक सलून में जाकर ड्रॉइंग बनाया करते थे।


और उनकी ड्रॉइंग इतनी अच्छी होती थी कि सलून का मालिक उनके बाल मुफ्त में काट देता था। और जब कभी भी बाल कटवाने की जरूरत नहीं होती थी तो वह सलून मालिक उन्हें पैसे भी दिया करता था। लेकिन वह ड्रॉइंग पैसों के लिए नहीं बनाते थे वे इसलिए बनाते थे क्योंकि सलून मालिक उनकी ड्रॉइंग को अच्छे से रखकर दिवार पर लगा देता था।


और बहुत सारे लोग उनकी ड्रॉइंग को देख कर उन्हें शाबाशी देते थे। जिससे डिज्नी को दिल से खुशी मिलती थी। और उनका मनोबल बढ़ता था। दोस्तो डिज्नी को वह दिन भी देखने पड़े जब उन्होंने ट्रेन में जाकर पॉपकॉर्न, कोल्डड्रिंक जैसे सामान बेचे। ऐसे ही बहुत सारे काम करने के बाद पैसे जोड़कर उन्होंने कंसास सिटी आर्ट्स इंस्टिट्यूट में आर्ट की क्लासेस लेनी शुरू कर दी।


आगे भी कुछ सालों तक यूं ही संघर्ष और पढ़ाई चलती रही। और फिर 1918 में पहले विश्वयुद्ध की समाप्ति के बाद डिज्नी ने अमेरिकी सेना में जाने का अप्लाई किया। लेकिन कम उम्र की बजे से उन्हें रिजेक्ट कर दिया गया। और फिर उन्होंने अपनी डेट ऑफ बर्थ को चेंज कर कर रेट क्रॉस में एंबुलेंस चलाने के लिए अप्लाई किया। जहां उन्हें सेलेक्ट कर लिया गया और उनकी पोस्टिंग फ्रांस में कर दी गई।


दोस्तों वॉल्ट डिज्नी  अभी तक बहुत सारे अलग-अलग काम करते जा रहे थे। लेकिन उनके दिमाग में आर्ट की फील्ड में हमेशा से कुछ कर गुजरने का मन था। वह अपने एंबुलेंस को हमेशा अपनी हाथ से सजा कर रखते थे। डिज्नी ने 1919 में रेड क्रॉस को छोड़ दिया। और फिर वापस अमेरिका आ गए।


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क्योंकि उनकी जॉब बेमेंन ग्रुविंग कॉमर्सियाल आर्ट स्टूडियो मे एक आर्टिस्ट के तौर पर लग गई थी। लेकिन 1920 में उन्हें यह कहकर निकाल दिया गया कि उनमें क्रिएटिविटी नहीं है। उनमें कल्पना शक्ति की कमी है और वह किसी भी खूबसूरत चीज का निर्माण नहीं कर सकते। लेकिन यह बात डिज्नी के दिल पर बैठ गई थी।


क्योंकि उन्होंने पूरे जीवन हर चीज से समझौता समझोता किया था लेकिन अपनी ड्रॉइंग से कभी समझौता नहीं किया था। अपना बदला लेने के लिए डिज्नी ने एक छोटी सी कंपनी खोली लेकिन वह बहुत जल्दी दिवालिया हो गई। दोस्तों डिज्नी की जेब में केवल $20 और कागज की गद्दी का बना एक बैग बचाता। जिसमें एक तरफ कुछ कपड़े और दूसरी तरफ ड्रॉइंग बनाने की कुछ सामान रखे थे।


लेकिन उन्होंने अपने प्रयासों और कोशिशों को कभी नहीं छोड़ा। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने भाई के बचाए हुए $2000 से एक कंपनी और खोली जिसका नाम उन्होंने डिज्नी ब्रदर्स स्टूडियो रखा। बाद में इसका नाम बदलकर द वर्ल्ड डिज्नी कंपनी रख दिया गया।


और दोस्तों कहते हैं ना कि हार मानों नहीं तो कोशिश बेकार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। डिज्नी ब्रदर द्वारा बनाई गई यह कंपनी बहुत जल्दी चल पड़ी। और फिर आगे चलकर उन्होंने बहुत सारे लोगों को जॉब पर रखा। अब डिज्नी का कैरियर काफी हद तक पटरी पर आ चुका था।


उन्होंने जुलाई 1925 में उन्होंने लिलियन नाम की एक लड़की से शादी कर ली जो उनकी कंपनी में बतौर एक आर्टिस्ट काम करती थी। लेकिन दोस्तो आप बात करते हैं उनके कैसे कार्टून की जिसकी मदद से उन्हें शिखर पर पहुंचा दिया। 1928 में न्यूयॉर्क से कैलिफोर्निया जाते हुए। ट्रेन में जाते हुए उन्होंने एक अजीबो-गरीब कार्टून बनाना शुरु किया।


और अंत में उन्होंने एक चूहे कि आकार का ड्रॉइंग मनाया। जिसका नाम उन्होंने अपनी पत्नी के कहने पर मिकी दिया। और फिर ड्रॉइंग का एनिमेशन बनाकर फिर उन्होंने मिकी को अपनी आवाज दी। 18 नवंबर 1928 को वॉल्ट ने उसका पहला शो दिखाया। जिसे लोगों ने बहुत पसंद किया। और फिर उसके बाद से वॉल्ट डिज्नी में कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा।


और एक के बाद एक बेहतरीन फिल्में इस दुनिया को दी। उन्होंने पूरी दुनिया से 950 से ज्यादा पुरुस्कार और सम्मान प्राप्त किए। और यही नहीं इस इंडस्ट्री के सबसे बड़े आर्डर ऑस्कर अवॉर्ड के लिए उनका 59 बार नामांकित किया गया। जिसमें से 22 बार वह इसे जीतने में सफल रहे। आखिरकार इस दुनिया में एडमिशन फिल्मों को एक नई ऊंचाई देने के बाद। 15 नवंबर 1966 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहां।




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Hemraj Kumar 


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