हल्दीराम्स की शुरुआत कैसे आखिर हुई

हल्दीराम्स की शुरुआत साल 1937 में राजस्थान के बीकानेर जिले से हुई थी। जब तनसुख दासदत्त नाम के शख्स ने अपनी बहन से भुजिया बनाने का तरीका सीखा। और बीकानेर में एक छोटी सी दुकान चलाकर अपने घर का खर्चा उठाने लगा।


haldiram success story in hindi
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तनसुख दास के बेटे शिवकिसन अग्रवाल ने इस  रेसिपी को एक नया रूप देने की कोशिश की। उन्होंने उसे पहले से ज्यादा स्वादिष्ट बना दिया। इस छोटे से फेरबदल ने उनकी दुकान के बाहर लंबी लाइन लगा दी।


और लोग वह स्वाद चखने के लिए उनकी दुकान पर आने लगे। क्योंकि उसका स्वाद उन लोगों को इतना अच्छा लगा कि वह लाइन में लगने के लिए भी तैयार हो गए।


हल्दीराम्स की सफलता की कहानी haldiram success story in hindi


देखते ही देखते इस छोटी सी दुकान से एक बड़ा ब्रांड सामने आया। जिसे हम हल्दीराम के रूप में जानते हैं। हल्दीराम शिवकिसन अग्रवाल का दूसरा नाम था।


 हल्दीराम ने देखते ही देखते कोलकाता, नागपुर, नई दिल्ली में अपनी ब्रांच खोल ली। और नमकीन से शुरू हुई इस कंपनी ने नमकीन और मिठाइयों की ढेरों वैरायटी मार्केट में उतारी। 


और यह बात भी सच है कि समय के साथ चला जाए तो बहुत आगे जा सकते हैं। और यह बात हल्दीराम ब्रांड ने बहुत अच्छी तरीके से समझा। और यह ब्रांड मिठाइयों और नमकीन की ढेरों वैरायटी पर ही नहीं रुका, बल्कि समय के साथ अपने आप में बदलाव लाता रहा।


हल्दीराम्स की सफलता की कहानी haldiram success story in hindi


हल्दीराम्स के करीब 100 प्रोडक्ट मार्केट में है। और इसमें आइसक्रीम, डेयरी प्रोडक्ट्स और कुकीज़ जैसे बहुत सारे प्रोडक्ट है। हल्दीराम ने आज की समस्या को लेकर लोगों के लिए तुरंत खाना बनाने के लिए रेडी टू ईट फूड भी बनाना शुरू कर दिया।


आज नागपुर, कोलकाता, दिल्ली, पटना जैसे शहरों में हल्दीराम के रेस्ट्रॉन्ट भी खुल गए हैं। यह ब्रांड इंडिया में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपना नाम बना चुका है। जिनमें श्री लंका, इंग्लैंड, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यू जीलैंड, जापान और थाईलैंड जैसे 50 देशों के मार्केट में हल्दीराम के प्रोडक्ट आसानी से देखे जा सकते हैं।


हल्दीराम की 2016 में सालाना कमाई 4000 करोड़ थी। और कस्टमर को ध्यान में रखने वाली इस कंपनी को हल्दीराम की कंपनी 15 हजार करोड़ तक पहुंचाना चाहती है।


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Hemraj Kumar 


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